१९९३ में र्डा.केशुभाइ देसाई के कालजयी प्रशिष्ट उपन्यास 'ऊघइ' का स्वयं लेखक द्रारा संपन्न हिन्दी अनुवाद 'दीमक' भारतीय ज्ञानपीठ द्रारा प्रकाशित हुआ था ! गुजरात की साम्प्रादायिक समस्या पर आघारित इस रचना के विषय में तन्कालिन निर्देशक र्डा. आई. पाडुरंग राव ने कहा था : "यह केवल उपन्यानस ही नहिं, उपनिषद भी है" !
'दीमक' के अलावा र्डा.केशुभाइ देसाई की प्रमुख रचनाये भारतीय ज्ञानपीठ द्रारा प्रकाशित हुई हैं : 'हरा भरा अकाल', 'दाह', 'घर्मयुघ्घ' इत्यादि !
र्डा.केशुभाइ देसाई भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्काकर चयन समिति (प्रवर परिषद) के सदस्य हैं !
'घर्मयुघ्घ' गुजरात के दंगो पर आघारित त्रासदी - कथा है, जिसके विषय में प्रसिघ्घ गांघी विचारक श्री नारायण देसाई लिखते हैं: यह कथा लिखकर लेखकने गुजरात के पापो का पक्षालन किया है!
इस प्रकार उन्होने गुजरात का एवं पूरी मानवता का अमिट उपकार किया है!
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